Wednesday, May 19, 2010

हैरान नहीं हुआ जाता

आज यानी एक ही दिन में सुनने को मिली दो ख़बर। एक, 3 जी स्पेक्ट्रम की निलामी से सरकार को मिली 70 हजार करोड़ रूपये। दूसरी तरफ, सीएनजी की कीमत में 20 प्रतिशत का इज़ाफ़ा। 70 हजार करोड़ रूपये पा कर भी ये कैसा नुकसान या मजबूरी है कि कीमतें बढ़ाई जा रही है? वैसे ही मंहगाई की जाल में फंसे नागरिकों की टैक्सी, ऑटो से यात्रा भी सीएनजी की कीमत बढ़ने से मंहगी हो जाएगी। जिन कम्पनियों ने 3जी स्पेक्ट्रम के लिए इतना पैसा सरकार को दिया है वह सब वसूल करेंगे आम नागरिक यानी उपभोक्ता से, वो भी अपने खास स्टाइल में जो कभी खुलकर सामने नहीं आता। ऐसे में इस सरकार को मुर्ख कहूं, बेहूदा कहूं, गुंडा कहूं या एक नए ढंग का आतंकवादी जिसका हम चुनाव से पहले शायद कुछ नहीं बिगाड़ सकते। वैसे चुनाव के समय भी हम अक्सर सब कुछ भूल जाते हैं।

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